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अजमेर, हिन्दुस्तान की आवाज, अजहर उमरी

अजमेर 11 जुलाई 2017 । सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के वंशज एवं वंशानुगत सज्जादा नशीन दीवान सैयद जैनुल आबेदीन अली खान ने अमरनाथ यात्रियों पर हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे आतंकियों की कायराना हरकत करार दिया। अमरनाथ यात्रियों पर हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि हमले से कश्मीर का सिर शर्म से झुक गया है।

दरगाह दीवान ने जारी बयान में कहा कि अमरनाथ यात्रियों पर हुए आतंकी हमले की जितनी निंदा की जाए कम है इस हमले में कश्मीर का सिर शर्म से झुक गया है और साथ ही उन्होंने इस हमले को कश्मीरियों पर आतंकवाद का घिनौना धब्बा करार दिया है।

उन्होंने भारत के मुसलमानों और कश्मीरी युवाओं से आह्वान किया कि आतंकवाद पर पाकिस्तान के खिलाफ आवाज उठा कर दुनिया को सार्थक और सटीक संदेश दें की भारत का मुसलमान ईमान के साथ शांति और कुरान का सच्चा मुहाफिज है।

उन्हो ने कहा कि इस्लाम में खून खराबे और निर्दोष लोगों की हत्या करना शरीयत और इंसानियत की खिलाफवर्दी है समय आ गया है कि सभी को साथ मिलकर इन आतंकियों और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ उन्हें उन्ही की ज़बान में जवाब दें।

दरगाह दीवान ने कहा कि आतंकवादियों की इस घटना ने विश्व के मुसलमानो के प्रति घृणा को भडIवा देने का काम किया हे जब की इस आतंकी घटना को किसी धार्मिक समूह यह धार्मिक वर्ग से जोड़ कर नहीं देखना चाहिए क्योंकि आतंकवाद का धर्म नहीं होता और धर्म के नाम पर आतंकवाद करने वाले धार्मिक अनुयाई नहीं होते इसलिए ऐसे समय में जब देश पर आतंकवाद का घिनौना संकट आ रहा हो तो देश के सभी धर्मों के लोगों को एकजुटता के साथ इनसे लड़ाई लड़नी चाहिए क्योंकि इस प्रकार की घटनाएं दो धार्मिक समूहों के बीच खाई खोदने की साजिश भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की आतंकी घटनाओं को इस्लामिक आतंकवाद या हिंदू आतंकवाद का नाम लेना सरासर गलत है क्योंकि धार्मिक कट्टरता के आधार पर की गई किसी भी आतंकवादी संगठन को किसी धर्म पंथ या वर्ग से जोड़ कर नहीं देखा जा सकता क्योंकि आतंकी कार्यवाही करने वाले व्यक्ति का धर्म से कोई ताल्लुक नहीं होता है वह तो केवल धर्म का इस्तेमाल अपने निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिए करते हैं।


दीवान आबेदीन ने कहा कि आतंकवाद पूरी दुनिया के लिये चुनौती बना हुआ है कुछ देश आतंकवाद के खिलाफ कार्यवाही करके ख़ानआपूर्ति में लगे हुए है जिससे ये समस्या बहुत गंभीर हो रही हे। इस समस्या के खिलाफ सभी देशों को एकजुटता से कार्यवाही करनी होगी।

दरगाह दीवान ने कहा कि देश के सभी धर्म गुरुओं को एकजुटता के साथ इन आतंकवादी संगठनों के खिलाफ एकजुटता से निर्णायक लड़ाई लड़नी होगी तभी इस्लाम को बदनाम कर के आतंकी घटनाएं करने वाले इन आतंकियों को करारा जवाब दिया जा सकेगा क्योंकि शरीयत किसी भी सूरत में किसी बेगुनाह को जान से मारने या शारीरिक हानि पहुंचाने की कतई इजाजत नहीं देता तो अलगाववाद के नाम पर इस प्रकार की कार्यवाही शरीयत के कानून के खिलाफ है इसलिए उन अलगाववादी ताकतों को यह समझ लेना चाहिए कि धार्मिक कट्टरता और आतंकवाद के लिए शरीयत और उसके कानून में कोई जगह नहीं है।

उन्होंने अमरनाथ यात्रा में आतंकी हमले के शिकार हुए सभी मृतकों को श्रद्धांजलि देते हुए उनके परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और सरकार से मांग की कि इस प्रकार के आतंकवादी संगठनों ओर अलगाववादी संगठन जो इन के समर्थक हे इन के खिलाफ निर्णायक लड़ाई की मुहिम को सफलता की ओर अग्रसर करें।

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