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लंदन। शराब कारोबारी विजय माल्या को आज भारत सरकार के आग्रह पर स्कॉटलैंड यार्ड ने लंदन में गिरफ्तार कर लिया हालांकि उन्हें गिरफ्तारी के तीन घंटे के अंदर ही अदालत से जमानत मिल गयी। माल्या को गिरफ्तार करने के बाद वेस्टमिंस्टर की अदालत में पेश किया गया जहां संक्षिप्त सुनवाई के बाद उन्हें जमानत मिल गयी। माल्या ऋण डिफाल्ट के मामले में भारत में वांछित है। उसे तब गिरफ्तार किया गया जब वह आज सुबह मध्य लंदन पुलिस थाने में पेश हुआ। स्कॉटलैंड यार्ड ने कहा, ‘‘मेट्रोपॉलिटन पुलिस की प्रत्यर्पण इकाई ने आज सुबह प्रत्यर्पण वारंट पर एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया।' जमानत मिलने के बाद माल्या ने ट्वीट कर कहा कि उम्मीद के मुताबिक अदालत में प्रत्यर्पण मामले में सुनवाई हुई। माल्या ने अपनी गिरफ्तारी को लेकर भारतीय मीडिया में सनसनी फैलाने पर चुटकी भी ली। उसने बाद में भारतीय टीवी समाचार चैनल आजतक से बातचीत में खुद को बेकसूर बताया। इससे पहले, भारत सरकार को आज ब्रिटिश सरकार से एक संदेश मिला जिसमें कहा गया है कि प्रत्यर्पण वारंट पर विजय माल्या को गिरफ्तार कर लिया गया है। भारत सरकार माल्या के प्रत्यर्पण के लिए काफी दस्तावेज ब्रिटिश सरकार को मुहैया करा चुकी है। माल्या के खिलाफ भारत की विभिन्न अदालतों से गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुके हैं। उनके खिलाफ सीबीआई ने विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया हुआ है। वह 17 भारतीय बैंकों के नौ हजार करोड़ रुपए लेकर चंपत होने के आरोपी हैं। इस बीच, सीबीआई सूत्रों ने बताया है कि स्कॉटलैंड यार्ड ने इंटरपोल के माध्यम से भारत की केंद्रीय जांच एजेंसी को जानकारी दी है कि माल्या को हिरासत में लिया गया है। सीबीआई सूत्रों ने बताया है कि माल्या के प्रत्यर्पण के लिए जांच एजेंसी की टीम जल्द ही लंदन के लिए रवाना होने वाली है। इस बीच, वरिष्ठ वकीलों का कहना है कि भारत सरकार को लंदन की अदालत में यह साबित करना होगा कि माल्या आर्थिक अपराधी हैं और उन्हें कानून का सामना करने के लिए भारत भेजा जाना जरूरी है। इससे पहले भी कई बार ऐसा हुआ है जब भारत से भागे हुए लोगों को सरकार के आग्रह पर हिरासत में तो लिया गया लेकिन अदालत में उनके खिलाफ मामला साबित नहीं हो पाने पर उनका प्रत्यर्पण नहीं हो पाया।
माल्या की निष्क्रिय हो चुकी किंगफिशर एअरलाइन्स पर विभिन्न बैंकों की नौ हजार करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी है। वह दो मार्च 2016 को भारत से भागकर ब्रिटेन पहुंच गया था। जनवरी में एक भारतीय अदालत ने बैंकों के एक समूह को ऋण वसूली की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया था। वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों ने उसकी गिरफ्तारी को मामले में पहली सफलता बताया जिसमें अब ब्रिटेन में यह तय करने के लिए एक कानूनी प्रक्रिया होगी कि क्या माल्या को भारतीय अदालतों में आरोपों का सामना करने के लिए प्रत्यर्पित किया जा सकता है। भारत ने ब्रिटेन के साथ प्रत्यर्पण संधि के अनुरूप आठ फरवरी को एक ‘नोट वर्बेल’ के जरिए माल्या के प्रत्यर्पण के लिए औपचारिक आग्रह किया था। नयी दिल्ली ने आग्रह सौंपते हुए कहा था कि माल्या के खिलाफ उसके पास एक ‘‘जायज’’ मामला है। इसने उल्लेख किया था कि यदि प्रत्यर्पण आग्रह का सम्मान किया जाता है तो यह ‘‘हमारी चिंताओं के प्रति’’ ब्रिटेन की ‘‘संवेदनशीलता’’ को प्रदर्शित करेगा।
पिछले महीने ब्रिटिश सरकार ने माल्या के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया के संबंध में भारत के आग्रह को प्रमाणित कर इसे आगे की कार्रवाई के लिए एक जिला न्यायाधीश के पास भेज दिया था। ब्रिटेन से प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में न्यायाधीश द्वारा गिरफ्तारी वारंट जारी करने सहित कई कदम शामिल होते हैं। वारंट के मामले में व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाता है और प्रारंभिक सुनवाई के लिए अदालत लाया जाता है। फिर विदेश मंत्री द्वारा अंतिम फैसला किए जाने से पहले एक प्रत्यर्पण सुनवाई होती है। वांछित व्यक्ति को किसी भी फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट सहित उच्च अदालतों तक अपील करने का अधिकार होता है। इस साल के शुरू में एक सीबीआई अदालत ने 720 करोड़ रुपये के आईडीबीआई बैंक ऋण डिफॉल्ट मामले में माल्या के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। 

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