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प्रतापगढ़(प्रमोद श्रीवास्तव)- हाल ही में अखनूर में हुए आतंकी हमले यूपी के प्रतापगढ़ के दो बहादुर नौजवानों ने अपनी जान गँवा दी थी | आज सुबह इन दोनों ही जवानों के शव तिरंगे में लिपटे हुए उनके गाँव पहुंचे | अपने जवान बच्चों को जैसे ही घर वालों ने एक ताबूत के भीतर पैक देखा उनके सब्र का बाँध टूट गया | सभी परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है |
सेना की तरफ से जारी बयान में मजदूर बताया गया था

बता दें कि अखनूर में एलओसी कैम्प के निकट जिस दिन आतंकी हमला हुआ तो जिसमें यह दोनों ही जवान शहीद हुए थे | उस दिन सेना के पीआरओ की तरफ से बयान जारी कर इन दोनों को ही जीआरईएफ कैम्प का मजदूर बताया था |
लेकिन आज जिस समय प्रतापगढ़ में उनके गाँव पर दोनों ही जवानों के शव पहुंचे तो एक अद्भुद द्रश्य ही सामने था | बता दें कि दोनों ही जवानों के शव एक सैनिक की ही भांति पूरे सम्मान के साथ ताबूत में थे और दोनों को तिरंगे से ढका गया था |
अब सवाल यह उठता है कि यदि यह दोनों जवान सेना के नहीं थे और यह मजदूर थे तो क्या सभी मजदूरों को पूरे सैनिक सम्मान के साथ उनके शवों को भेजा जाता है, तिरंगे में लिपटे हुए उनके भी शव आते है और प्रतापगढ़ के दोनों ही जवान सेना के जवान थे तो उस दिन सेना की तरफ से बयान जारी कर उन्हें बस एक मजदूर क्यों बताया गया था ?
खैर जो भी हो लेकिन एक बार फिर इस आतंकी हमले में कुछ मासूमों बहनों ने अपने भाई, माओं और पिताओं ने अपने बेटे देश ने अपने बेहतरीन नौ-जवानों को खो दिया है |

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