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मुंबई। शहर में बचे पुराने कुओं के पानी का उपयोग अभी तक पेड़ोँ आदि के लिए किया जा रहा था परंतु अब इसका उपयोग पीने के पानी के रूप में किया जाएगा। रानीबाग में भूमिगत पानी की टंकी बनाना संभव न होने के कारण पुराने जल स्त्रोतों के बारे में विचार किया जा रहा है।और पानी के वितरण की व्यवस्था बेहतर की जाएगी। इसके लिए तकरीबन आठ करोड़ रुपए खर्च किये जाएंगे।
वीरमाता जिजाबाई भोसले उद्यान व प्राणिसंग्रहालय का (रानीबाग) नवीनीकरण किया जा रहा है। केंद्रीय प्राणी संग्रहालय प्राधिकरण और उच्च न्यायालय के मार्गदर्शन के तहत थाईलैंड की एच.के.एस डिज़ाइनर एंड कन्सल्टेन्ट इंटरनॅशनल द्वारा बनाए गए मास्टर रुपरेखा के अनुसार मुख्य प्रवेशद्वार, सार्वजनिक सुविधा के अंतर्गत बगीचे का विकास आदि विविध विकास के कार्यों को किया जा रहा है। इस मास्टर रुपरेखा के अनुसार नए पिंजरे और उद्यान के साथ-साथ जानवरों के पीने के पानी के लिए पानी वितरण व्यवस्था तैयार की जा रही है।फिलहाल प्राणिसंग्रहालय में तीन पानी के कुएं हैं। इन कुओं के पानी का उपयोग वनस्पतियों और पेड़ोँ को पानी देने के लिए किया जाता है। फ्लैसिंग और जानवरों के पिंजरों को साफ करने के लिए भी इस पानी का उपयोग किया जाता है। वहां के कार्यालयों को पीने का पानी मनपा द्वारा उपलब्ध कराया जाता है। फ़िलहाल सभी
प्लॉट्स, जानवरों के पिंजरे, सार्वजनिक सुविधाओं का नवीनीकरण किया जा रहा है। इसके अलावा इंटरप्रिटेशन केंद्र इमारत, नया प्राणिसंग्रहालय अस्पताल, क्वारंटाईन क्षेत्र, कला प्रवेशद्वार क्षेत्र, मफतलाल मिल कंपाऊंड क्षेत्र का भी नवीनीकरण होगा। जिसके कारण दिनोदिन पानी के उपयोग की क्षमता में बढ़ोतरी होगी। उसके तहत उद्यान और प्राणिसंग्रहालय का सर्वेक्षण कर भविष्य में बढ़नेवाली पानी की आवश्यकता के अनुसार पानी वितरण व्यवस्था की रुपरेखा बनाई गई है। इसके लिए विभिन्न आकार की पाइप लाइनों को डालकर जलवितरण व्यवस्था को बेहतर किया जाएगा। इसके लिए तक़रीबन आठ करोड़ रुपए खर्च किया जाएगा। इसके लिए देव इंजिनियर्स  कंपनी को काम मिला है।
प्राणिसंग्रहालय के प्रभारी संचालक डॉ. संजय त्रिपाठी ने कहा कि जलवितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए यह कार्य किया जाएगा और स्थायी समिति की मंजूरी मिल जाने के बाद काम शुरू होगा। उद्यान में फ़िलहाल 3 कुएं हैं। इस उद्यान में भूमिगत पानी की टंकी बनाना संभव न होने के कारण प्राणिसंग्रहालय के कार्यालय के पास के कुओं का भूमिगत पानी की टाँकी के रूप में उपयोग किया जाएगा। बचे हुए  दो कुओं पर पंप लगाकर उन कुओं का पानी  प्राणिसंग्रहालय कार्यालय के पास स्थित कुओं में छोड़ा जाएगा। साथ ही पीने के पानी की वितरण व्यवस्था के लिए नई भूमिगत पानी की टाँकी नहीं बनाई जाएगी। और जो उपलब्ध है उसी जा उपयोग किया जाएगा। फ़िलहाल इन टाकियों का उपयोग जानवरों के पीने के पानी के लिए किया जाता है।

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