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मुंबई। एट्रोसिटी कानून को कठोरता से लागू किया जाए। एट्रोसिटी कानून का दुरुपयोग किया जाता है। कानून को कठोरता से क्रियान्वित करने के लिए सरकार ने कौन सा कठोर कदम उठाया है। इस बारे में जानकारी हेतु श्वेतपत्रिका मांगने के लिए और
एट्रोसिटी कानून की बदनामी करने का करण्याचे षडयंत्र शुरू होने के विरोध में मुंबई में 24 दिसंबर को संविधान सन्मान महामोर्चा निकाला जाएगा। यह जानकारी महामोर्चा के संयोजक श्यामदादा गायकवाड ने पत्रकार में दी।
    मुंबई मराठी पत्रकार संघ में आयोजित पत्रकार परिषद में श्यामदादा गायकवाड ,डॉ. भालचंद्र मुणगेकर, पूर्व विधायक उपेंद्र शेंडे, मिलिंद भवार, एड. किरण चन्ने आदि मान्यवर उपस्थित थे। गायकवाड़ ने कहा कि आरएसएस और भाजपा की सरकार सत्ता में आने के बाद से ही दलित,मुस्लिम और आदिवासियों पर 40 से  50 प्रतिशत अन्याय और अत्याचार बढ़ गया है। जातीय तनाव बढ़ने के बावजूद मुख्यमंत्री चुप हैं। नाशिक और राज्य में विभिन्न लोगों पर हो रहे अत्याचार की जांच के लिए न्यायालयीन जांच की जाए।
     गायकवाड़ ने कहा कि 24 दिसंबर को निकाला जा रहा मोर्चा किसी भी समाज के विरोध में नहीं। मराठा समाज के साथ संवाद करने की कोशिश की जाएगी। मराठा समाज को आरक्षण देना होगा तो संविधान के आधार पर दिया जाए। एट्रोसिटी कानून पिछले 20 वर्षों में किस तरह से क्रियान्वित किया गया और कितने लोगों को सजा हुई इस बारे में श्वेतपत्रिका निकाले जाने पर इस कानून का कौन दुरुपयोग करता है यह पता चलेगा। डॉ.भालचंद्र मुणगेकर ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री एट्रोसिटी कानून में बदलाव करने के लिए कह रहे हैं तो ऐसा लगता हैं कि उन्होंने यह कानून अभी तक पढ़ा नहीं है। मराठा समाज और उनके मोर्चे का अनुकरण न हो इसलिए 24 दिसंबर का मोर्चा बोलका मोर्चा होगा।

मोर्चा की मांगे
एट्रोसिटी कानून का कठोरता से पालन हो
नाशिक में बौद्ध दलित पर हुए सामूहिक अत्याचार की जांच करने के लिए न्यायालयीन आयोग बनाया जाए।
बौद्ध,दलित,आदिवासी,मुस्लिम सहित सभी अल्पसंख्यों पर हो रहे अत्याचारों पर कड़ाई से लगाम लगाया जाए।
खैरलांजी और कोपर्डी के गुन्हेगारों को फांसी दी जाए।
मुस्लिमों को 5 प्रतिशत आरक्षण और ओबीसी के आरक्षण से छेड़खानी न की जाए।

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